मोबाइल की लत: बच्चों का भविष्य खतरे में! 60% स्कूली बच्चों को नींद की बीमारी

मोबाइल की लत बच्चों का भविष्य खतरे में

मोबाइल का बढ़ता उपयोग जितना लोगों के लिए फायदेमंद है। उतना ही ज़्यादा लोगों के लिए खतरनाक भी हैं। मोबाइल की लत के कारण आजकल हर कोई अपना सारा समय सोशल मीडिया, मोबाइल पर ही बिता रहा हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है, कि क्या मोबाइल फ़ोन इतने ज़्यादा जरूरी हो गए हैं। हम आज इतने व्यस्त हो गए है, कि हम लोगों के पास हमारे बच्चों के लिए समय नहीं हैं। बड़े तो बड़े आज कल हमने बच्चों को भी इसकी लत लगा दी हैं।

आज के समय में ऐसा कोई बच्चा नहीं होगा। जिसे मोबाइल फ़ोन चलाना नहीं आता होगा। दुख की बात तो यह है, कि हम हमारे साथ मासूम बच्चों का भी भविष्य ख़राब कर रहे हैं। मोबाइल फ़ोन का बढ़ता इस्तेमाल कैसे उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता हैं। कैसे उनसे उनकी ज़िंदगी को छीन सकता हैं। यह अभी तक लोगो को पता नहीं हैं।

मोबाइल का अंधाधुंध इस्तेमाल और दुष्परिणाम

  • मोबाइल का बढ़ता उपयोग जानलेवा हो सकता है।
  • मोबाइल फ़ोन के अधिक इस्तेमाल से सबसे पहले आँखो और दिमाग़ पर असर पड़ता हैं।
  • इतना ही नहीं हमे थकान महसूस होने लगती हैं। ये हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालती हैं।
  • मोबाइल फ़ोन से निकलने वाली ब्लू लाइट आँखों पर तनाव डालती हैं। जिससे आँखों पर भारीपन महसूस होता हैं।
  • इसके अधिक इस्तेमाल से कई बार लोगों की आँखों की रोशनी कम हो जाती हैं।
  • सरदर्द की समस्या होने लगती हैं। कमर में दर्द कभी गर्दन में दर्द अनेकों समस्याएं पैदा होने लगती हैं।
  • आजकल तो बच्चों में कम उम्र में ही हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के बढ़ते इस्तेमाल से लखवा जैसी बीमारी होने लगी हैं।
  • कम उम्र में इसके इतेमाल से बच्चे बोल नहीं पाते उनके बोलने और सुनने की क्षमता पर असर तो पड़ता ही हैं।
  • साथ ही उनकी सेहत और किसी भी चीज़ को समझने की क्षमता कम होने लगती हैं।
  • मोबाइल की लत हर साल बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है।
  • बच्चों का मोबाइल के प्रति बढ़ता लगाव उनकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा रहा है।
  • हर साल मोबाइल की लत की वजह से न जाने कितने बच्चों की सेहत बिगड़ रही है।

डिजिटल दुनिया के नुकसान

एक रिसर्च से सामने आया है, कि जो बच्चा मोबाइल का उपयोग अधिक करता हैं। उसकी समझने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती हैं। वह बोलना कम कर देता हैं। साथ ही उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आ जाता हैं। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता हैं। वह बाक़ी बच्चों की तुलना में कम एक्टिव होता हैं।कहीं-कहीं तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं। जहाँ अपनों से बढ़कर मोबाइल फ़ोन हो जाते हैं। ये सुनने में बहुत ही अजीब लगता हैं। लेकिन ये सच हैं।

मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बच्चों के ऊपर बहुत ज़्यादा प्रभाव डालता हैं। वो उन्हें जाने अनजाने में एक क्राइम की दुनिया में ले जाते हैं। पेरंट्स को पता भी नहीं चलता कि बच्चा फ़ोन में क्या देख रहा हैं। कभी-कभी बच्चे मोबाइल फ़ोन की लत से इतने बेकाबू हो जाते है, कि उन्हें अपनों की बाते समझ नहीं आती । और वे ऐसे कदम उठा लेते हैं। जो उनकी जिंदगी को उजाड़ देते हैं।

WHO के अनुसार

5 साल से कम उम्र वालो बच्चों को 1 घंटे से ज़्यादा स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए। 1 घंटे से ज्यादा बच्चो को मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी आदि देखने ना दे। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में कई बच्चे दिन में 3-6 घंटे तक मोबाइल पर समय बिता रहे हैं। जो की बच्चो के लिए खतरा है।

AIIMS और ICMR के अनुसार

लगभग 25-30% बच्चों में मोबाइल के कारण नींद की कमी, मोटापा, आंखों की समस्या और मानसिक तनाव जैसी कई समस्याएं देखने को मिली हैं। कॉरोनकाल के बाद यह प्रतिशत और भी ज्यादा बढ़ गया है।

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