सहारा इंडिया रिफंड 2025: भारत सरकार ने दी मंजूरी, अगस्त से शुरू होगा भुगतान

सहारा इंडिया रिफंड 2025

सहारा इंडिया निवेशकों के लिए राहत: डूबा हुआ पैसा अब वापस मिलेगा

सालों से सहारा इंडिया में निवेश करने वाले लाखों लोग अपने पैसों का इंतजार कर रहे थे। कई बार उम्मीद जगी, लेकिन फिर मामला अटक गया। अब आखिरकार भारत सरकार ने इस पर बड़ा फैसला लिया है, और राष्ट्रपति ने भी इसे मंजूरी दे दी है। सहारा इंडिया का पैसा अब वापस मिलेगा। सहारा इंडिया से पैसे वापस लेने के लिए आपके पास जरुरी दस्तावेज होने चाहिए। बैंक पासबुक, आधार कार्ड आदि होना अनिवार्य हैं। जिन लोगो के 1,000 से लेकर 10,000 रुपये तक निवेश हैं।

उन्ही लोगो को पैसा वापस रिफंड किया जाएगा। यह पैसा लेने के लिए आप सहारा की वेबसाइड पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। यह पैसा और कोई नहीं बल्कि भारत सरकार दे रही हैं। भारत सरकार का यह फैसला सहारा के निवेशकों के लिए बहुत ही बड़ी खुशी लेकर आया हैं। सहारा का पैसा अगस्त महीने से ही दिया जा रहा हैं।

अब आपका इंतजार ख़त्म हुआ। अब सेकेंड फेज में बड़ी संख्या में लोगो को पैसा मिलेगा। कुछ निवेशकों को पहली क़िस्त मिल चुकी हैं। अब उन सेकेंड क़िस्त का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह सहारा इंडिया निवेशकों के लिए बड़ी राहत हैं। सरकार और सहारा की टीम ने साथ में मिलकर यह फैसला किया हैं। दोनों के साथ में फैसले से, आम लोगो को राहत मिली हैं। काफी समय से लोगो के पैसे सहारा इंडिया में फसे हुए थे। लोगो की धीरे-धीरे आश भी टूटी जा रही थी।

ऐसी खबर है, कि सहारा इंडिया सेकेंड क़िस्त 50,000 तक दे रहा हैं। पहली क़िस्त भी इसके बराबर थी। यह फैसला बहुत ही सोच समझकर लिया गया हैं, लेकिन आप इतना मत सोचिए आप भी अपने फसे हुए पैसे लेने के लिए जुट जाइए।सरकार जानती हैं, की निवेशक कितनी मुश्किल से पैसे बचाकर निवेश करते हैं। अगर पैसा ही ना मिले तो लोगो का भरोसा ही उठ जाएगा। भारत सरकार के इस फैसले से सहारा इंडिया के निवेशकों को राहत की सांस आई हैं।

पैसा लेने के लिए ज़रूरी बातें:

  • आपके पास बैंक पासबुक और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज होना चाहिए।
  • आपको सहारा इंडिया की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा।
  • अगस्त 2025 से इस योजना के तहत भुगतान शुरू हो चुका है।

Sahara India Pariwar क्या है?

Sahara India Pariwar, जिसका मतलब “Sahara का परिवार” होता है, एक बड़ा और विविधतापूर्ण इंडियन कॉंग्लोमेरट है, जिसकी नींव 1978 में सुब्रत रॉय साहारा ने रखी थी। इसका मुख्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।

विवाद और कानूनी मामला

सहारा इंडिया को कई बार कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सबसे बड़ा मामला 2010 में सामने आया। उस समय SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने सहारा की कुछ निवेश योजनाओं को नियमों के खिलाफ बताया। SEBI का कहना था कि कंपनी ने निवेशकों से जो पैसा जुटाया है, वह सही तरीके से नहीं किया गया है, इसलिए यह पैसा निवेशकों को वापस करना होगा। मामला धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

इसके बाद RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) ने भी सहारा की कुछ वित्तीय गतिविधियों को नियमों के खिलाफ पाया। RBI ने आदेश दिया कि सहारा इंडिया फाइनेंशियल 2015 तक अपने निवेशकों की जमा राशि उन्हें लौटा दे।

यानी, सहारा के लिए यह समय काफी मुश्किल था—एक तरफ कानूनी लड़ाई और दूसरी तरफ निवेशकों का पैसा लौटाने का दबाव। सहारा इंडिया की कहानी उतार-चढ़ाव से भरी है। एक समय यह भारत की सबसे बड़ी और लोकप्रिय चिटफंड व निवेश कंपनियों में से एक मानी जाती थी। सहारा ग्रुप ने रियल एस्टेट, मीडिया, एयरलाइंस, हॉस्पिटैलिटी, खेल और कई अन्य क्षेत्रों में काम किया। देशभर के छोटे-छोटे निवेशकों से लेकर बड़े ग्राहकों तक, लाखों लोग इस ग्रुप से जुड़े हुए थे।

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